सेना को 14 फरवरी को पुलवामा हमले के बाद से ही कामरान की तलाश थी और चार दिनों के बाद आखिरकार सफलता मिल ही गई। कामरान ही वह दहशतगर्द था, जिसका दिमाग सीआरपीएफ जवानों का काफिले पर पुलवामा में हुए आत्मघाती हमले के पीछे था। उसने पाकिस्तान में बैठे अपने आका मसूद अजहर के इशारे पर वारदात को अंजाम दिया था।

सुरक्षाबलों को जम्मू-कश्मीर में पुलवामा से करीब 10 किलोमीटर दूर पिंग्लेना में आतंकियों के छिपे होने की सूचना मिली थी। इसके बाद सोमवार तड़के सर्च ऑपरेशन चलाया गया। शहीद हुए चारों जवान 55 राष्ट्रीय राइफल्स के थे। इनमें मेजर वीएस धौंदियाल, हवलदार शिवराम, सिपाही अजय कुमार और सिपाही हरि सिंह शामिल हैं।

कौन था अब्दुल रशीद गाजी उर्फ कामरान 

 

अब्दुल रशीद गाजी उर्फ कामरान ही वह दहशतगर्द था, जिसका दिमाग सीआरपीएफ जवानों का काफिले पर गुरुवार को पुलवामा में हुए आत्मघाती हमले के पीछे था। जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के टॉप कमांडर कामरान ने पाकिस्तान में बैठे अपने आका और जैश सरगना मौलाना मसूद अजहर 

के इशारे पर इस वारदात को अंजाम दिया था। गाजी ने ही हमले की पूरी साजिश रची और वह मसूद अजहर के सबसे विश्वसनीय करीबियों में से एक था। 

दिसंबर में ही कश्मीर में आ गया था कामरान 
सुरक्षा बलों के द्वारा मसूद अजहर के भतीजों तल्हा रशीद और उस्मान को मार गिराने के बाद से ही कामरान को को घाटी में भेजा गया। उस्मान की हत्या के फौरन बाद जैश-ए-मोहम्मद ने एक बयान जारी कर बदला लेने की बात कही थी। अजहर लंबे समय से बदला लेने की सोच रहा था। माना जाता है कि मसूद ने कामरान को दिसंबर के पहले हफ्ते में घाटी में भेजा था। 3 जनवरी को हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया ने सबसे पहले टॉप जैश कमांडर के पुलवामा में छिपे होने की रिपोर्ट प्रकाशित की थी। 

अफजल गुरु की बरसी पर थी हमले की प्लानिंग 
आतंकियों ने 9 फरवरी को संसद पर हमले के मास्टरमाइंड अफजल गुरु की बरसी पर अपने नापाक मंसूबों को अंजाम देने की साजिश रचनी शुरू कर दी थी। लेकिन ‘प्लानिंग में गड़बड़ी’ की वजह से बाद में 14 फरवरी को सीआरपीएफ के काफिले पर हमला किया, जिसमें 40 जवान शहीद हो गए। गुरुवार को विस्फोटकों से लदी SUV को CRPF के काफिले में ले जाकर आत्मघाती हमलावर डार ने धमाका कर दिया था।